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स्तन रोग किसी भी आयु, हार्मोन स्तर में बदलाव या किसी दवा के कारण हो सकता है

स्तन रोग


स्तन रोग कैंसरमुक्त (हलके) या कैंसर सम्बन्धी(घातक) होते हैं। अधिकांश स्तन रोग कैंसरमुक्त होते हैं, जिनके होने से जीवन पर कोई खतरा नहीं होता और उन्हें उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। परन्तु स्तन कैंसर का मतलब स्तन या जीवन का नुकसान होता है। इसी कारण से महिलाओं में स्तन कैंसर उनके जीवन पर सबसे बड़ा खतरा है। स्तन रोगों को या तो प्रजनन प्रणाली के विकार, या प्रजनन के विकारों के साथ वर्गीकृत किया जा सकता है। स्तन रोगों के कई प्रकार होते हैं, वे संक्रमण के साथ या बिना संक्रमण के छाती पर गाँठ का कारण बनते हैं।


कुछ स्तन रोग हलके होते हैं, जो हानिरहित होते है। और कुछ घातक, जिसका अर्थ है कि वे फैल सकते हैं। सबसे आम हैं मास्टिटिस (जीवाणु संक्रमण), सिस्ट, हलकी गांठ और कैंसर जैसे स्तन रोग होते हैं। स्तन रोग के उपचार के लिए उनका प्रारंभिक पता लगाना आवश्यक हैं। 



स्तन कैंसर

आज के युग में, महिलाओं में स्तन कैंसर मौत का सबसे बड़ा कारण है। स्तन कैंसर की जाँच आत्म-परीक्षण से संभव हैं। स्तन कैंसर के बहुत से लक्षण हैं जो की शुरूआती दिनों में जाँचे जाने पर इलाज किये जा सकते हैं।





स्तन कैंसर के लक्षण

स्तन कैंसर से संबंधित लक्षण आम हैं। इन्ही लक्षण के कारण हर साल 15 मिलियन से अधिक महिलाएँ डॉक्टर के पास जांच के लिए जाती हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं:

स्तन दर्द
गाँठ: जो अन्य स्तन ऊतक से अलग महसूस होती है।
सूझन जो दूर नहीं होती है।
चुचुक के चारों ओर त्वचा गीली महसूस होती हैं।
स्तन की त्वचा में गढ़े-जैसा महसूस होना, लाली छाना, मोटाई या दबाव
स्तन के आकार में परिवर्तन।
चुचुक में परिवर्तन, जैसे अंदर खींच लिया जा रहा है।
गाँठ जो त्वचा या छाती के चारों ओर महसूस होती है।


स्तन कैंसर की जांच 

स्तन असामान्यताओं का पता निम्नलिखित जाँच द्वारा किया जा सकता हैं:

1. कैंसर स्क्रीनिंग

२. चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (एमआरआई)

३. मैमोग्राफी

४. अल्ट्रासोनोग्राफी

५. बायोप्सी



आयुर्वेदिक चिकित्सा से उपचार -

स्तन कैंसर अगर शुरुआती चरण में निदान और इलाज नहीं किया जाता है तो यह घातक हो सकता है. आयुर्वेद, स्तन कैंसर के लिए अच्छा इलाज प्रदान करता है.

आयुर्वेदिक उपचारों में से कुछ का उल्लेख नीचे दिया गया है:



खाद्य पदार्थों को शामिल करें, जो आपके आहार में विटामिन डी के साथ अच्छी तरह से आपूर्ति की जाती हैं. शोध से पता चलता है कि उनके शरीर में कम मात्रा में विटामिन डी वाली महिलाएं स्तन कैंसर विकसित करने की अधिक संभावना होती हैं. अपने आहार में अंडे, नारंगी का रस, डेयरी उत्पादों और मछली जैसे सालमन जैसे खाद्य पदार्थों पर विचार करें.
ग्रीन टी का अधिक सेवन करें क्योंकि इसमें एंटी कैंसर गुण होते हैं.
चलने, योग, ध्यान और कुछ स्तन अभ्यास जैसे अभ्यास आपको दर्द संवेदना को आराम करने, तनाव को कम करने और ठीक होने में भी मदद कर सकते हैं.
अपने आहार में कड़वा लौकी जूस शामिल करें. शोध से पता चलता है कि कड़वा गाढ़ा उन कैंसर कोशिकाओं को मार सकता है, जो स्तन कैंसर का कारण बनता है.
अश्वगंध, तुलसी, कर्क्यूमिन जैसे आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों में कुछ गुण हैं जो कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट कर सकते हैं.
स्तन कैंसर में कम जीवित रहने की दर है. यदि आप आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से ठीक होना चाहते हैं, तो आयुर्वेदिक चिकित्सक से मिलने के लिए यह बिल्कुल जरूरी है.



स्तन कैंसर का आधुनिक उपचार -

रोबोटिक सर्जरी ने कैंसर के उपचार में क्रांति का काम किया है। रोबोट ट्यूमर के किसी भी स्थान पर पहुंच सकता है जोकि पारंपरिक सर्जरी के माध्यम से मुश्किल था। थायराइड व गर्दन के कैंसर में मरीज को सर्जरी के बाद निशान रह जाता है, जबकि रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से रोगियों, विशेष रूप से युवा रोगियों को निशान और विकृति से बचा सकते हैं। रोबोटिक सर्जरी के कारण रिकवरी तेज और बहुत आसान है।

डा. लीना डढवाल ने बताया कि स्तन कैंसर के इलाज के लिए अब नई सर्जिकल तकनीक उपलब्ध है। पहले की तुलना में बड़ी संख्या में स्तन कैंसर के केस में स्तनों को हटाने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार एडवांस स्टेज कैंसर के मामलों में भी स्तनों का संरक्षण किया जा रहा है।

मेडिकल आंकोलोजी (दवाओं के जरिए कैंसर का इलाज) अब इतनी उन्नत हो गई है कि बड़े पैमाने पर सर्जरी की आवश्यकता न्यूनतम हो गई है। 


ब्रैस्ट कैंसर की होम्योपैथिक दवा - Breast cancer ki homeopathic dawa 





ब्रेस्ट कैंसर के उपचार के लिए उपयोग की जाने वाली आम दवाएं निम्नलिखित हैं:

कार्सिनोसिनम (Carcinosinum)
सामान्य नाम: ए नसोड़ फ्रॉम कार्सिनोमा (A nosode from carcinoma)
​लक्षण: ये दवा उन लोगों के लिए ज्यादा असरदार है, जिन्हें कभी कैंसर था या उनके परिवार के किसी सदस्य को कैंसर था। निम्नलिखित लक्षण अनुभव होने पर ये दवा दी जाती है:
तेज दर्द होना।
ब्रेस्ट का सख्त होना या गांठ बनना।
गर्भाशय में रसौली। 
ब्रेस्ट से असामान्य रिसाव होना।
रक्तस्त्राव और स्तन में दर्द।
बदहजमी और पेट में गैस बनना। 
हड्डियों और जोड़ों से संबंधित लक्षण।
आत्महत्या के ख्याल आना।
 
कोनियम मैकुलेटम (Conium Maculatum)
सामान्य नाम: पाइजन हेमलॉक (Poison hemlock)
लक्षण: ये दवा उन लोगों को सूट करती है, जिनका स्वभाव उदासीन होता है और उन्हें शोक के कारण समस्याएं होती हैं। इसे निम्नलिखित लक्षणों के लिए उपयोग किया जाता है;
ब्रेस्ट में सख्त गांठें।
बहुत तेज दर्द होना। (और पढ़ें - गर्भावस्था में ब्रेस्ट पेन के कारण)
निप्पल में चुभन वाला दर्द होना।
गहरी सांस लेने या चलने पर लक्षण बिगड़ जाना।
कमजोरी और लड़खड़ाना। 
पीरियड्स के दौरान और पहले ब्रेस्ट में दर्द और भारीपन।
बगल की ग्रंथियों में उल्सर और सूजन।
ब्रेस्ट में दूध न होने पर भी गांठें मौजूद होना।
स्तन का ढीलापन और सिकुड़न। 
पेशाब करने के बाद सफेद रिसाव।
अंडाशय की सूजन। 
नसों की कमजोरी, जिससे पैरालिसिस तक हो सकता है।
अल्ट्रासाउंड में ओवरी का सामान्य से बड़ा लगना।
 
फायटोलेका डिकेन्डरा (Phytolacca Decandra)
सामान्य नाम: पोक रुट (Poke root)
लक्षण: नीचे दिए गए कुछ लक्षण अनुभव करने पर ये दवा दी जाती है:
दर्दनाक और भारी ब्रेस्ट।
ब्रेस्ट के रंग में हल्का बैंगनीपन।
स्तन में सख्त गांठें महसूस होना। 
बगल में मौजूद ग्रंथियों की सूजन। 
निप्पल में दर्द होना और उनका फटना।
निप्पल्स का अंदर की तरफ मुड़ना।
निप्पल्स से खून जैसा रिसाव होना।
स्तन ग्रंथियों से गर्मी निकलना और उनकी सूजन।
स्तन ग्रंथियों में पस से भरे फोड़े। 
स्तनपान कराते समय निप्पल का दर्द पूरे शरीर में फ़ैलना। 
पीरियड्स के दौरान और पहले ब्रेस्ट में दर्द।
अंडाशयक के क्षेत्र में दर्द।
 
एस्टेरियस रुबेंस (Asterias Rubens)
सामान्य नाम: रेड स्टारफिश (Red starfish)
लक्षण: निम्नलिखित लक्षण अनुभव होने पर ये दवा दी जाती है:
ब्रेस्ट की नसों में दर्द।
ब्रेस्ट में लगातार हल्का दर्द होते रहना, जो उल्टे हाथ और उसकी उंगलियों तक फैल सकता है।
ऐसा महसूस होना जैसे स्तन अंदर की तरफ खिंच रहे हैं।
निप्पल्स का अंदर की तरफ जाना।
ब्रेस्ट में अल्सर होना। 
उल्टा हाथ और उसकी उंगलियां सुन्न होना।
दर्द या अन्य लक्षणों का हिलने-डुलने पर बढ़ जाना।
 
थूजा ऑक्सिडेंटलिस (Thuja Occidentalis)
सामान्य नाम: आर्बर विटै (Arbor vitae)
​लक्षण: नीचे दिए लक्षण के लिए ये दवा असरदार है:
त्वचा पर मस्से होना। पूरे शरीर और स्तन में तेज चुभन वाला दर्द।
आराम करने पर दर्द बढ़ना और सूखे मौसम में बेहतर हो जाना।
तेज़ी से वजन कम होना। 
ब्रेस्ट में गांठें।
निप्पल्स के पास दर्दनाक गांठें बनना।
शरीर के दाएं हिस्से में लक्षण अधिक अनुभव होना।
ठंडा मौसम बर्दाश न कर पाना। (और पढ़ें - सर्दियों में क्या खाएं)
निप्पल्स का अंदर की तरफ मुड़ना।
दाएं अंडाशय में दर्द।
 
पल्सेटिला प्रेटेंसिस (Pulsatilla Pratensis)
सामान्य नाम: विंडफ्लॉवर (Windflower)
लक्षण: निम्नलिखित लक्षणों को अनुभव करने पर ये दवा दी जाती है:
लक्षणों का बदलना।
लक्षण बताते हुए रोना आ जाना।
खुली हवा में लक्षण बेहतर होना।
निप्पल से पीले रंग का रिसाव। 
अंगों को हाथ लगाने में दर्द होना।
फैट वाला खाना खाने से लक्षण बढ़ जाना।
पीरियड्स में रुकावट के कारण हार्मोन संबंधी समस्याएं। 
छाती के क्षेत्र में अल्सर।
ठंड लगना।
बच्चे को दूध पिलाते समय मां को बहुत ज्यादा दर्द होना। 
 
सोरिनम (Psorinum)
सामान्य नाम: स्कैबीज वेसिकल (Scabies vesicle)
लक्षण: नीचे दिए लक्षणों में इस दवा का उपयोग किया जाता है:
ब्रेस्ट की सूजन।
ब्रेस्ट में दर्द। 
निप्पल में दर्द के साथ खुरदुरा व जलन वाला रिसाव।
ब्रेस्ट और निप्पल में जलन और अल्सर।
निप्पल से खुरदुरे रिसाव के कारण ग्रंथि में रगड़ लगना।
अत्यधिक गंभीर खुजली होना।
अल्सर होना, जिन्हें ठीक होने में समय लगता है।
सूखापन और एक्जिमा। 
अत्यधिक ब्रेस्ट में खुजली के कारण सो न पाना।
 
आर्सेनिकम एल्बम (Arsenicum Album)
सामान्य नाम: आर्सेनियस एसिड (Arsenious acid)
लक्षण: नीचे दिए गए लक्षण अनुभव करने पर इस दवा का उपयोग किया जाता है:
ब्रेस्ट में अल्सर।
कमजोरी होना। 
बीमारी से मरने का डर।
गुस्सा आना और यह चिंता होना कि दवा लेना व्यर्थ है क्योंकि मौत होने वाली है। 
दर्द के कारण बेचैनी होना, जिससे महिला इधर-उधर घूमती रहती है।
निप्पल्स से बहुत ही असामान्य और खून की तरह रिसाव होना।
ब्रेस्ट में जलन होना।
चिंता के कारण अच्छी नींद भी न आना। 
नम मौसम, आधी रात के बाद और कोल्ड ड्रिंक पीने से लक्षण बढ़ जाना।
सिकाई से लक्षण बेहतर होना।

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