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कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवोत्थानी एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। इस वर्ष देवउठनी एकादशी 8 नवम्बर को है। इस दिन चातुमांस समाप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु जो क्षीर-सागर में सोए हुए थे, वो जागते हैं हरि के जागने के बाद से ही सभी मांगलिक कार्य शुरू किए जाते है। इस दिन भगवान विष्णु, माँ


लक्ष्मी और तुलसी की विशेष पूजा और व्रत किया जाता है। तुलसी का विवाह शालिग्राम से किया जाता है। व्रती स्त्रियाँ इस दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन में चैक पूरकर भगवान विष्णु के चरणों को कलात्मक रूप से अंकित करती है। तुलसी विवाह उत्सव भी प्रारम्भ होता हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है 11 जुलाई के बाद विवाह आदि मांगलिक कार्य 19 नवम्बर से प्रारम्भ होगें जोकि 12 दिसम्बर 2019 तक विवाह के लग्न होगे।  16 दिसम्बर से सूर्य की धनु संक्रान्ति के कारण खरमास शुरू हो जायेगें उसमें भी विवाह आदि कार्य नहीं होते है। उसके बाद मकर संक्रान्ति के बाद 15 जनवरी 2020 से मांगलिक कार्य की शुरूवात हो सकेगी वर्ष 2020 में 79 विवाह के लग्न मिलेंगे


तुलसी विवाह

 कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन ही लोग तुलसी विवाह का आयोजन करते है। कुछ स्थानो पर कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को भी तुलसी विवाह का आयोजन करते है।  तुलसी वैष्णवों के लिये पूजनीय पौधा है। भगवान के श्रीविग्रह शालीग्राम के साथ तुलसी जी का विवाह धूम-धाम से करते है। इन दिन लोग तुलसी के गमले को गेरू  आदि से रंग कर गन्ने का मण्डप बनाकर तुलसी के ऊपर चुनरी चढ़ाते है। गमले को साड़ी के लपेट कर तुलसी जी को चूड़ी पहनाकर उनका सिंगार करते है। गणपति, शालीग्राम जी का पूजन कर ‘तुलस्यै नमः’ का जाप करते है। नारियल दक्षिणा के साथ टीका के रूप में रखते है। तथा भगवान शालीग्राम के विग्रह का सिंहासन हाथ


में लेकर तुलसीजी के सात परिक्रमा कराकर आरती के पश्चात् विवाह उत्सव पूर्ण करते है। विवाह के समान मंगल गीत भी गाये जाते है यदि लड़के या लड़कियों के विवाह, दामपत्य सुख में विध्न हो तो माता तुलसी का पूजन करने से कष्ट दूर होता है एवं घर में सुख-शन्ति की वृद्वि होती है 

शुभ विवाह मुर्हूत-हिन्दू धर्म में विवाह को सात जन्मों का बंधन माना जाता हैं।शास्त्रों के अनुसार, शादी को बेहद ही पवित्र और मांगलिक कार्य कहा गया हैं जिसे केवल शुभ मुहूर्त, शुभ तिथि और विशेष नक्षत्र में ही संपन्न किया जाना चाहिए।शुभ मुहूर्त और शुभ तिथि में किये गए हर कार्य में सफलता प्राप्त होती हैं। विवाह संस्कार में तिथि को शरीर, चंद्रमा को मन, योग व नक्षत्रों को शरीर का अंग और लग्न को आत्मा माना गया है। यानि लग्न के बिना विवाह अधूरा होता है।

नवम्बर 2019-  19, 20, 21, 22, 23, 27 28 29 30
दिसम्बर 2019.    1, 5, 6, 7, 10,11 12 
जनवरी 2020    15, 16,17 18 19 20 21 29, 30, 31
फरवरी’ 2020    3, 4 5 9, 10, 11, 12, 13, 14, 16 17 18 19 20 25 26, 27
मार्च’   2020    1 2, 3 7, 8, 9, 11 12 13
अप्रैल’ 2020    14, 15, 25, 26, 27
मई’    2020    1 2,3 4 6, 7, 8, 9 10 11 12, 13, 17, 18, 19, 23, 24, 25,
जून’   2020    13, 14, 15 25, 26, 27, 28, 29, 30, 
नवम्बर’ 2020    26, 29, 30
दिसम्बर’ 2020   1 2 6, 7, 8 9 10, 11

- ज्योतिषाचार्य - एस.एस.नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ
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