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त्वचा के रोग अनेक कारणों से होते हैं। इन कारणों पर प्रकाश डालने से पूर्व यह जान लेना आवश्यक है कि प्रत्येक मनुष्य की त्वचा एक जैसी नहीं होती और न ही इस पर समान कारणों का एक जैसा प्रभाव ही पड़ता है।

वैसे तो यह टीनिया नामक वायरस के कारण माना जाता है, परन्तु होम्योपैथी के अनुसार शरीर में सोरा दोष और टूबरकूलर (tubercular diathesis) माना जाता है। यह किसी वर्म या कीड़े के कारण नहीं होता है। शरीर के अलग अलग जगह पर होने के कारण इसके अलग–अलग नाम है, जैसे शरीर में हैं, तो टीनिया कार्पोरिस (tenia corporis), सिर में है तो टीनिया केपेटिस (tenia capatis), पैर में है तो टीनिया पेडिस (tinia pedis), हाथों में है तो टीनिया मेनम (tinia menum) आदि। यह बहुत तेजी से फैलने वाला रोग होता है। नमी या पसीने के कारण यह तेजी से फैलता है। अधिकतर लोगों को यह groin area में ज्यादा होता है।

लक्षण…
दाद वाले स्थान पर खुजली होना
दाद में जलन होना
त्वचा पर लाल रंग के गोल-गोल चकत्ते होना
चिपचिपा सा पानी बहना
गले में हमेशा कफ आते रहना
आंव (dysentery) की तकलीफ होना
चिड़चिड़ापन होना

होम्योपेथिक दवाएं……
होम्योपेथिक दवाओं से दाद हमेशा के लिए ठीक हो जाता है। होम्योपैथी में रोगी के शारीरिक और मानसिक लक्षण के अनुसार दवा दे कर रोग को ठीक किया जाता है।

क्रासोबियम(CHRYSAROBINUM 30)…..

यह त्वचा पर बहुत तेजी से काम करती है । पैर और जाघों (LEGS & THIGHS) में अत्याधिक खुजली होना। दाद से एक विशेष प्रकार की गंध वाला पानी निकलना। त्वचा (skin), पपड़ी (dandruff) के रूप में निकलती है। यह दाद का पानी सुखा कर चर्म (skin) को रोगमुक्त करती है।

बेसिलिनम (BACILLINUM 200)….

फेफड़ों (lungs) की पुरानी तकलीफ, रिंगवर्म, एक्जिमा, सांस संबधित तकलीफ, गले की ग्लांड्स बढ़ी हुई रहती हैं। चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन रहे। (इस दवा को बार-बार रिपीट न करें)

पेट्रोलियम (PETROLEUM)….

त्वचा बहुत ज्यादा रुखी  (DRYNESS OF SKIN) होती है। रात में ज्यादा खुजली होती हैं। त्वचा इतनी खुरदुरी (ROUGH & CRACKED) होती है, कि जरा में ही खून निकल आता है। अक्सर चर्म रोग ठण्ड में बढ़ता है। बारीक-बारीक पानी भरे छाले हो जाते हैं। खुजली के साथ जलन होती है। उगंलियो के सिरे फटे हुए रहते हैं।

ग्रेफैटिस( GRAPHITES)…

दाद या किसी भी प्रकार के चर्मरोग से पानी बहता रहे जो शहद के समान चिपचिपा हो। छोटी से छोटी चोट भी पक जाती हैं। त्वचा में दरारें पड़ जाती हैं। उंगलियों के नाख़ून काले हो जाते हैं, और फट जाते हैं। चर्मरोग के साथ-साथ गले में कफ की तकलीफ हो। कब्ज की शिकायत रहे। त्वचा में रात को तकलीफ ज्यादा हो, लेकिन ढक कर रखने से कम हो जाती हैं। सिर में खुजली हो।

क्रोटन-टिग(CROT-TIG)….

बहुत ज्यादा खुजली हो खास कर जननागों (GENITAL AREA) में। खुजली के बाद दर्द हो। पानी भरे छाले हो, हेर्पिस-जोस्टर, पस भरे दाने, कुछ भी खाते पीते ही दस्त लग जाएं।

रस-टोक्स(RHUS-TOX)

त्वचा पर पानी भरे छाले हो जाते हैं। त्वचा लाल रंग की होती है। अत्याधिक जलन होती है। त्वचा सूख कर झरती है। बहुत ज्यादा खुजली होती है। अत्याधिक बेचैनी रहती है। त्वचा रोगों के साथ-साथ जोड़ो का दर्द होता है। बहुत ज्यादा नींद आती है।

नोट– होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर करके रोगी को ठीक किया जाता  है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग  होती हैं। अतः बिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी  हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें।
डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने है|

साभार 

आप ने सन  2006 में राजीव गांधी होम्योपथिक मेडिकल कॉलेज इंदौर मध्यप्रदेश से साढ़े पांच वर्षीय कोर्स B.H.M.S. ( बेचलर ऑफ़ होम्योपथिक मेडिसिन एंड सर्जरी ) किया है, और इंदौर में होम्योपथिक क्लिनिक है। कॉलेज के अलावा , इंदौर के सुप्रसिद्ध होम्योपथिक चिकित्सक स्व. डॉ. एम. बी. सक्सेना (93 वर्ष) से भी होम्योपथी का ज्ञान प्राप्त किया है, जो सन 1932 से होम्योपथी की प्रैक्टिस कर रहे थे। अपने इतने वर्षों की प्रैक्टिस में आपने होम्योपथी से कई साध्य -असाध्य और इमर्जेंसी के रोग ठीक किए हैं।  इसके अलावा  आप निशुल्क होम्योपथिक शिविर भी लगाती हैं, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग होम्योपथी का फायदा उठा सकें।

2 comments:

  1. Replies
    1. उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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