Recent Posts



वेदों में सूर्य पूजा का महत्व है। प्राचीन ऋषि-मुनियों ने सूर्य शक्ति प्राप्त करके प्राकृतिक जीवन व्यतीत करने का सन्देश मानव जाति को दिया था।

सूर्य चिकित्सा के सिद्धान्त के अनुसार रोगोत्पत्ति का कारण शरीर में रंगों का घटना-बढना है। सूर्य किरण चिकित्सा के अनुसार अलग‍-अलग रंगों के अलग-अलग गुण होते हैं। लाल रंग उत्तेजना और नीला रंग शक्ति पैदा करता है। इन रंगों का लाभ लेने के लिए रंगीन बोतलों में आठ-नौ घण्टे तक पानी रखकर उसका सेवन किया जाता है।

मानव शरीर रासायनिक तत्वों का बना है। रंग एक रासायनिक मिश्रण है। जिस अंग में जिस प्रकार के रंग की अधिकता होती है शरीर का रंग उसी तरह का होता है। जैसे त्वचा का रंग गेहुंआ, केश का रंग काला और नेत्रों के गोलक का रंग सफेद होता है। शरीर में रंग विशेष के घटने-बढने से रोग के लक्षण प्रकट होते हैं, जैसे खून की कमी होना शरीर में लाल रंग की कमी का लक्षण है।

सूर्य स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का भण्डार है। मनुष्य सूर्य के जितने अधिक सम्पर्क में रहेगा उतना ही अधिक स्वस्थ रहेगा| जो लोग अपने घर को चारों तरफ से खिडकियों से बन्द करके रखते हैं और सूर्य के प्रकाश को घर में घुसने नहीं देते वे लोग सदा रोगी बने रहते हैं।

जहां सूर्य की किरणें पहुंचती हैं, वहां रोग के कीटाणु स्वत: मर जाते हैं और रोगों का जन्म ही नहीं हो पाता| सूर्य अपनी किरणों द्वारा अनेक प्रकार के आवश्यक तत्वों की वर्षा करता है और उन तत्वों को शरीर में ग्रहण करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं।

शरीर को कुछ ही क्षणों में झुलसा देने वाली गर्मियों की प्रचंड धूप से भले ही व्यक्ति स्वस्थ होने की बजाय उल्टे बीमार पड जाए लेकिन प्राचीन ग्रंथ अथर्ववेद में सबेरे धूप स्नान हृदय को स्वस्थ रखने का कारगर तरीका बताया गया है। उसमें कहा गया है कि जो व्यक्ति सूर्योदय के समय सूर्य की लाल रश्मियों का सेवन करता है उसे हृदय रोग कभी नहीं होता।

सूर्य पृथ्वी पर स्थित रोगाणुओं 'कृमियों' को नष्ट करके प्रतिदिन रश्मियों का सेवन करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करता है। सूर्य की रोग नाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद के एक मंत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है, विश्व में प्राण रूप है तथा अपनी रश्मियों द्वारा जीवों का स्वास्थ्य ठीक रखता है, किन्तु ज्यादातर लोग अज्ञानवश अन्धेरे स्थानों में रहते है और सूर्य की शक्ति से लाभ नहीं उठाते |

अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की लाल किरणों के प्रकाश में खुले शरीर बैठने से हृदय रोगों तथा पीलिया के रोग में लाभ होता है। प्राकृतिक चिकित्सा में आन्तरिक रोगों को ठीक करने के लिए भी नंगे बदन सूर्य स्नान कराया जाता है।

इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ॰ अजय सहगल का कहना है कि आजकल जो बच्चे पैदा होते ही पीलिया रोग के शिकार हो जाते हैं उन्हें सूर्योदय के समय सूर्य किरणों में लिटाया जाता है जिससे अल्ट्रा वायलेट किरणों के सम्पर्क में आने से उनके शरीर के पिगमेन्ट सेल्स पर रासायनिक प्रतिक्रिया प्रारम्भ हो जाती है और बीमारी में लाभ होता है। डाक्टर भी नर्सरी में कृत्रिम अल्ट्रावायलेट किरणों की व्यवस्था लैम्प आदि जला कर भी करते हैं।



सूर्य स्नान को धूप स्नान भी कहते हैं। भारत में तो कम पर विदेशों में यह (सन बाथ) बहुत ज्यादा लोकप्रिय है। थोड़ी देर सुबह की धूप में बैठने से आपको कई सेहत लाभ भी होते हैं। सूर्य की किरणें हमारे नाड़ी तंत्र या स्नायुमंडल का संचालन करके आवश्यक ऊर्जा प्रदान करती हैं। बेहतर होगा कि आप जब भी इसे करें, तो अधिक से अधिक धूप अपनी रीढ़ की हड्डी तक पहुंचने दें। जानें सूर्य स्नान क्या है, इसे कैसे करते हैं और इसके फायदे क्या-क्या होते हैं।


कैसे करें


- यदि आप सूर्य स्नान कर रहे हैं, तो आपका सिर छांव में होना चाहिए। आप चाहें तो इसे ढक भी सकते हैं। ऐसा इसलिए जरूरी है, क्योंकि सूर्य स्नान करते समय सूर्य की किरणें सीधे सिर पर नहीं पड़नी चाहिए।


- इस दौरान सूर्य किरणों को आत्मसात करने का समय ठंडी या पहाड़ी इलाकों में पूरे दिन किसी भी समय हो सकता है। अन्य जगहों पर जहां बहुत गर्मी रहती है, वहां सूर्य स्नान सूर्योदय के समय किया जाना बेहतर होता है। इस वक्त की सूर्य की गर्मी सहनीय होती है और शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती है।


- सूर्य स्नान के बाद थोड़ी देर छांव में टहलना या फिर पानी से स्नान करना सही होता है।

- इसे आप दस मिनट से लेकर आधे घंटे तक कर सकते हैं। शुरुआत दस मिनट से करें तो बेहतर होगा। आप चाहें तो इच्छा और समय के अनुसार धीरे-धीरे अवधि को बढ़ा सकते हैं।

- सूर्य स्नान लेते वक्त आप चाहें तो शरीर की मालिश भी कर सकते हैं। सप्ताह में एक दिन सूर्य की किरणों के नीचे सरसों के तेल से पूरे शरीर की मालिश करें। मालिश करने के बाद गुनगुनी धूप में सूर्य स्नान लेकर सूर्य की किरणों का अधिक लाभ उठाना चाहिए।


सूर्य स्नान के फायदे


1 यह कैल्शियम का सबसे बड़ा स्रोत है। इससे हड्डियां मजबूत रहेंगी। बढ़ती उम्र में सूरज की रोशनी शरीर की हड्डियों को मजबूत रखती है। रक्तचाप सामान्य रहता है। चर्मरोग एवं गठिया में लाभ मिलता है। शरीर को आवश्यक कैल्शियम और फाॉस्फोरस प्राप्त होता है।

2 सुबह के समय सूर्य की किरणों में स्नान करने से न केवल विटामिन डी का स्तर बढ़ता है, बल्कि वजन भी संतुलित रहता है। इस दौरान मालिश करने से शरीर में स्फूर्ति आती है। आप ऊर्जावान महसूस करते हैं।

3 गुनगुनी धूप त्वचा पर पड़ती है, तो इससे उच्च रक्तचाप कम होता है। दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा नहीं रहता। नियमित रूप से सन बाथ करते हैं, तो इससे न सिर्फ दांत मजबूत रहेंगे, बल्कि बालों की ग्रोथ भी अच्छी होगी।

4 गर्भवती महिला नियमित रूप से सन बाथ ले, तो शारीरिक थकान, पीठ में दर्द, मतली की समस्या से निजात मिलता है। इससे प्रतिरक्षा प्रणाली दुरुस्त रहती है और तनाव भी नहीं रहता। हाई कोलेस्ट्रॉल की शिकायत भी दूर होती है।

बरतें सावधानियां


- यदि मौसम ज्यादा गर्म है, तो सुबह जल्दी जागकर सूर्योदय के समय इसे करें।

- सूर्य के सामने बैठने पर चक्कर महसूस हो, तो डॉक्टर से सम्पर्क करें।

- बिना संरक्षण के सूर्य के सामने कभी न सोएं। आप चाहें, तो किसी विशेषज्ञ से इस बारे में सलाह ले लें, उसके बाद ही इसका अभ्यास करें।

-  लंबे समय के लिए इसे करें, तो टोपी, धूप का चश्मा और हल्के रंग का कपड़ा जरूर पहन लें।

- त्वचा संवेदनशील है और धूप में एलर्जी होने लगे, तो बेहतर होगा कि आप इसे ना ही करें।

साभार - मनीषा कश्यप (हेल्थ एंड कैरियर सलाहकार)

1 comments:

 
Top