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भाग -1

एक समय की बात है, एक छोटे से नगर में एक राजकुमारी रहती थी,जिसका नाम मोहिनी था |
मोहिनी स्वभाव से बहुत चंचल और मुक्त स्वभाव की लड़की थी| उसे पशु-पक्षियों व छोटे जीवों जैसे-चूहा, खरगोस आदि से बहुत प्यार था | मोहिनी अपनेे साथ कोई न कोई जीव हमेशा पाल कर रखती थी, जो उसका अकेलापन दूर करता था | वैसे तो मोहिनी के बहुत सारे मित्र थे, किन्तु उसकी राजमाता के डर से कोई उसके साथ खेल नही पाता, ना ही राजकुमारी उनके घर जा पाती थी|
क्योंकि राजमाता को-राजकुमारी के साधारण व राजकुमारी के पक्ष मे बात करने वाले लोगों का, राजकुमारी के साथ रहना पसन्द नही था,वह केवल उन्हीं लोगो को राजकुमारी के करीब आने देती थी, जो राजमाता के इशारे पर चले या राजकुमारी की  बुराई करे|
राजमाता दोहरे स्वभाव की महिला थी, वैसे तो वह सबके सामने राजकुमारी की बहुत अच्छी माँ होने का दिखावा करती थी किन्तु-अकेले मे वह राजकुमारी को बहुत भला बुरा कहती थी|राजमाता के इस नकारात्मक व्यवहार के कारण कोई भी राजकुमारी के करीब नही आता था| राजकुमारी के परिवार में उनका बड़ा भाई राजकुमार कमल सिंह राजपूत  तथा महाराज महेन्द्र सिंह राजपूत थे|
राजकुमारी के पिता महाराज महेन्द्र सिंह जी-राजकुमारी को बहुत प्रेम करते थे, किन्तु अपने राज्य के पालन व संचालन में व्यस्त रहने के कारण, वह राजकुमारी को बहुत समय नही दे पाते थे और ना ही उन्हें राजमाता के दुर्व्यवहार के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी थी | और ना ही कभी राजमाता उन तक राजकुमारी की पीड़ा को पहुंचने देती थी|
कुछ समय बात राजकुमार कमल सिंह का विवाह,हस्तिनापुर राज्य की कन्या रत्नावली से हो गया | रत्नावली बहुत ही शातिर व कुटिल स्वभाव की स्त्री थी, उसने आते ही राजमाता को अपने मीठे व चाटुकारितापूर्ण स्वभाव से अपने वश में कर लिया | राजमाता के सामने वह राजकुमारी को नीचा व हाथ से निकली हुयी लड़की साबित किया करती थी | राजवधू के आते ही पूरे महल का माहौल पूरी तरह बदल गया|
 राजकुमारी को पहले से ज्यादा समस्याओं का सामान करना पड़ता | क्योंकि राजमाता के साथ अब राजवधू भी उसको बात बात पर टोकती और कोसती थी | हर पल राजकुमारी को राजवधू से तुलना किया जाने लगा|राजकुमारी को महल के सारे काम भी करने पड़ते और राजमाता के ताने सुनने पड़ते थे |

दूसरी तरफ राजवधू अपने पति राजकुमार कमल सिंह के साथ, देश विदेश भ्रमण करती व मौज मस्ती करती| राजवधू का ख्याल राजपुत्री से बढ़कर होता व राजकुमारी के साथ परायों जैसा व्यवहार किया जाता था | राजकुमारी को हमेशा मर्यादा व जिम्मेदारी के नाम पर ताने सुनाये जाते थे | राजकुमारी रोज रोज की इन तानो व तंजकशी से पूरी तरह टूट चुकी थी |
इसी बीच उसके पिता ने राजकुमारी का विवाह करने का मन बना लिया | राजकुमारी के लिए वर देखने की जिम्मेदारी राजमाता पर सौंप दी | राजकुमारी मोहिनी की सुंदरता व चरित्र तथा स्वभाव सभी का मन मोह लेती थी | हर कोई राजकुमारी से विवाह के लिए आतुर था | कोई भी राजकुमारी को किसी भी कीमत पर अपनी पत्नी बनाना चाहता था | राजकुमारी अपने नाम के अनुरूप ही थी, वह सबका मन मोह लेती थी |
किन्तु राजमाता के राजकुमारी के प्रति लापरवाह स्वभाव के चलते, बहुत से दुष्ट राजकुमारो ने व पुरूषो ने इसका अनुचित लाभ उठाया |
कुछ दुष्ट लोगो ने छल प्रपंच करके स्वयं को किसी राज्य का राजकुमार बनाकर राजकुमारी से विवाह करने का प्रयास किया,राजमाता के लालची स्वभाव  से सभी परिचित थे | कई दुष्ट पुरुषों ने राजमाता के सामने स्वयं को धनाढ्य व कुशल बताकर, राजकुमारी के करीब आने का प्रयास किया |
राजकुमारी बहुत ही संस्कारी व माता पिता के निर्णय का मान रखने वाली कन्या थी, अत: राजमाता जिस भी पुरूष को उसके लिए चुनाव करती थी, राजकुमारी सिर झुकाकर स्वीकार कर लेती थी ,भले ही वह रिश्ता उसे पसन्द हो या ना हो | परन्तु उन दुष्ट पुरुषों का भेद किसी ना किसी तरह से खुल जाता, और विवाह खंडित हो जाता, किन्तु इस खंडन का भी जिम्मेदार राजकुमारी को ही ठहराया जाता था| उसे मनहूस अपशगुन कहकर कोशा जाता था |

यह क्रम इसी तरह जारी रहा, वर देखे जाते, और किसी ना किसी वजह से रिश्ता जोड़ने से पहले टूट जाता, राजकुमारी बार- बार विवाह के लिए अपना मन बनाती व वर मे अपने पति की छवि देखने लगती और किसी ना किसी वजह से उसकी सारी कल्पनायें नष्ट हो जाती | वह हर बार स्वयं की नजरों मे लज्जित होती वह अकेलेपन व तानों की पीड़ा से गुजरती थी | किन्तु किसी को भी राजकुमारी की भावनाओं से कोई लेना देना नहीं था |
 राजकुमारी की कई कई रात जागते व रोते हुए बितती थी,राजकुमारी ने खुद को स्वयं को व्यस्त रखने का प्रयास किया, किन्तु उसकी मन की पीड़ा उसे अन्दर ही अन्दर खा रही थी|
राजकुमारी का शरीर मूर्झाने लगा, वह बिमार रहने लगी |धीरे धीरे वह मानसिक रूप से अन्दर ही अन्दर टूटने लगी, जिसका दुष्प्रभाव उसके स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा |
राजमाता जिस भी धनाढ्य पुरूष का रिश्ता देखती, तुरन्त उसे उसका पति घोषित कर देती थी | राजकुमारी एक मिट्टी की गुड़िया बनकर रह गयी थी, जिसका जैसे मन करता वैसे खेलता था | उसके अकेलेपन व परेशानियों का अहसास किसी को भी नहीं था| वह अक्सर खुद से बाते करती,
वह ईश्वर से शिकायत करती कि - "उसके साथ ऐसा क्यों होता है?उसकी माँ का व्यवहार - उसके प्रति इतना नकारात्मक क्यों है?"

 राजकुमारी महादेव की भक्त थी, उसने बहुत से व्रत व पूजन किये | राजकुमारी महादेव भोलेनाथ से शिकायत व प्रार्थना करती कि  - "क्या उसके जीवन में एक भी ऐसा मित्र नहीं है जो सिर्फ उसकी सुने, हर हाल में उसके साथ खड़ा रहे, उसकी तकलीफ को, उसके अकेलेपन को बांट सके?"

 ईश्वर से अपनी पीड़ा व शिकायत करके वह भोलेनाथ के चरणों में,उसके लिए सुयोग्य वर ढूंढने की जिम्मेदारी सौंप दी |
शेष अगले भाग में ...........
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संपादक -मनीषा कश्यप 
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