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मनीषा कश्यप(संपादक) - संयुुुुुक्त  परिवार यह मानव सभ्यता और संस्कृति की आदर्श परम्परा है,जो कि आधुनिकीकरण की दौड़ मे व पश्चिमी सभ्यता के चलन मे लुप्त होती जा रही है |

आज की युवा पीढ़ी संयुक्त परिवार की परम्परा को अपनाने को तैयार नही है|वह आज एकाकी जीवन की परंपरा को लागू करना चाहते हैं|
रिश्तों की महत्ता को समझना कोई नहीं चाहते हैं|दादी - नानी की कहानिया व दादा जी के जीवन के अनुभवों तथा चाचा -ताऊ के मजेदार खेल से आज की नयी पीढ़ी अन्जान है |बच्चों का बचपन सिर्फ कार्टून व मोबाइल गेमों ने लिया है | सावन के झूले और गिल्ली डंडा तो मानो जैसे खो से गये हैं |
आज हर कोई सिर्फ दिखावे मे अन्धा हो रखा हैै,पैसो की दौड़ मे जीवन पीछे छूट चुका है |
मानव का जीवन सिर्फ अपने पति-पत्नी व बच्चो तक सीमित हो गया है, जिसके कारण आज की पीढ़ी रिश्तों की संवेदनाओ से दूर हो चुका है |जिसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ी पर पड़ रहा है | नैतिकता, चरित्र व मर्यादा का अनुसरण कराने वाला व समझाने वाला कोई नहीं है |बुजुर्ग की सीख को युवा  लोग बोझिल व बकवास समझ रहे हैं | छोटे छोटे बच्चे कम आयु मे ही सेक्स व नशे के गिरफ्त में आ रहे हैं| क्योंकि पैसे कमाने व बच्चों को महंगी सुविधा देने की होड़ मे,आज माता पिता के पास, बच्चो के पास बैठने व उन पर ध्यान देने का समय ही नही है|बच्चो को क्या देखना चाहिए क्या समझना चाहिए यह विचार करने वाला कोई नही है |
जिसके दुष्परिणाम यह है कि -आज छोटे छोटे बच्चे बलात्कार जैसे जघन्य अपराध की ओर बढ़ रहे है | मानवता व एकता की बात का महत्व विचार करना नही चाहते हैं | जिसके कारण युवा पीढ़ी सांप्रदायिक हिंसा की ओर आगे बढ़ रही है | 
युवा समाज सिर्फ एक ही बात सीख रहा है कि ज्यादा से ज्यादा सुविधा सम्पन्नता कैसे अर्जित किये जाए | इसके लिए वह किसी भी नियम कानून व नैतिकता की हानि करने के लिए तैयार है |
त्याग, सादगी सरलता व चरित्र निर्माण कार्य , बिना परिवार के साथ रहे समझना कठिन है |
परिवार हमे आपस में मिलकर तालमेल बैठाना व एक दूसरे के सहयोग से गृहस्थ का अनुसरण करते हुए आपस में बाट कर खाना सिखाता है | एक दूजे की कमियों को अपनाते हुए उनकी ताकत बनना सिखाता है|
मानव की पहली पाठशाला उसका परिवार होता है जहाँ उसे अनेकता में एकता व विभिन्नता मे तालमेल बैठाना व प्रत्येक रिश्ते की डोर में शामिल होकर जीवम की नयी पुरानी शिक्षा दीक्षा से गुजरना पड़ता है |
हम जब तक एक आदर्श परिवार की स्थापना नही करते, नये पुराने पीढ़ी का साथ 
नही लेकर चलेगे, तब तक आदर्श समाज की कल्पना व्यर्थ है |

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